लखनऊ से एक दिन की यात्रा में बाराबंकी की ओर स्थित देवा शरीफ, हाजी वारिस अली शाह की दरगाह के लिए जाना जाता है। उनका जन्म इसी शहर में हुआ था। यहाँ हर साल उर्स और देवा मेला भी आयोजित होते हैं।
- स्थान: बाराबंकी ज़िला, उत्तर प्रदेश
- दूरी: लखनऊ से यात्रा की दूरी लगभग 25–42 किमी बताई जाती है।
- बस का विकल्प: UPSRTC की बसें लखनऊ और देवा शरीफ के बीच 6:00 AM से 9:00 PM तक चलती हैं।
- मौसमी आयोजन: उर्स सफ़र के महीने में होता है; देवा मेला संतों की स्मृति में आयोजित किया जाता है।

देवा शरीफ और इस क्षेत्र में इसका महत्व
देवा शरीफ को हाजी वारिस अली शाह का जन्मस्थान माना जाता है। वे 19वीं सदी की पहली तिमाही में जन्मे सूफ़ी संत थे और 7 April 1905 को उनका निधन हुआ। उन्हें वहीं दफ़नाया गया जहाँ उनका देहांत हुआ था। उनकी स्मृति में हिंदू और मुस्लिम अनुयायियों ने वहाँ एक स्मारक बनवाया।
इस दरगाह में हिंदू और ईरानी वास्तुकला की झलक मिलती है। 2011 की ज़िला जनगणना पुस्तिका के अनुसार, इसका निर्माण 1905 में हुआ था। इससे यह परिसर शहर के धार्मिक जीवन के साथ-साथ उसके वास्तु इतिहास में भी अहम स्थान रखता है।
बाराबंकी ज़िला मुख्यालय देवा शरीफ से 12 किमी दूर है। लखनऊ में घूमने-फिरने की आपकी योजना में शहर का मेट्रो नेटवर्क भी काम आ सकता है: लखनऊ मेट्रो के स्टेशन और कनेक्शन।
लखनऊ से देवा शरीफ कैसे पहुँचें?

लखनऊ से देवा शरीफ बस या सड़क मार्ग से टैक्सी, तिपहिया वाहन अथवा जीप से पहुँचा जा सकता है। प्रकाशित स्रोतों में दूरी लगभग 25 से 42 किमी तक बताई गई है, इसलिए निकलने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी जाँच लें।
UPSRTC की बसें लखनऊ और बाराबंकी से देवा शरीफ के लिए 6:00 AM से 9:00 PM के बीच चलती हैं। लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज़ की समय-सारणी में राजाजीपुरम और देवा के बीच चलने वाला रूट 18 शामिल है। यह चारबाग, निशातगंज, पॉलीटेक्निक, अवध बस स्टेशन (कामता) और चिनहट तिराहे से होकर जाता है।
अगर आप ट्रेन से आ रहे हैं, तो देवा शरीफ से 12 किमी दूर बाराबंकी निकटतम रेलवे स्टेशन है। ट्रेन की समय-सारणी और आगे के परिवहन की जानकारी अलग से जाँच लें। देवा शरीफ से लगभग 54 किमी दूर लखनऊ निकटतम हवाई अड्डा है।
Hotel Vijay Paradise से शहर का केंद्र कार से लगभग 34 मिनट की दूरी पर है। आप शहर के केंद्र में घूमने-फिरने के साथ राम मनोहर लोहिया पार्क भी जा सकते हैं, जो कार से लगभग 28 मिनट दूर है।

दरगाह की सम्मानपूर्वक यात्रा की योजना
यह दरगाह हाजी वारिस अली शाह की समाधि है। इसके इतिहास में स्मारक के निर्माण में हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के अनुयायियों की भागीदारी का उल्लेख मिलता है। यात्रा की योजना बनाते समय परिसर के धार्मिक महत्व का ध्यान रखें और भीतर जाने से पहले स्थानीय दिशा-निर्देशों की जानकारी ले लें।
हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर सालाना उर्स सफ़र के महीने में होता है, जिसे जुलाई बताया गया है। हाजी वारिस अली शाह ने अपने पिता का उर्स कार्तिक में आयोजित किया था, जिसे October–November बताया गया है। देवा मेला संतों की स्मृति में आयोजित होता है। शहर के मौसमी आयोजनों के बारे में जानने के लिए देखें लखनऊ के त्योहार और आयोजन कब होते हैं।

कब जाएँ और कितना समय रखें
देवा मेला संतों की स्मृति में आयोजित होने वाला दस दिन का आयोजन है। इसके कार्यक्रम में दरगाहों पर चादर चढ़ाना, सांस्कृतिक और खेल आयोजन, पशु बाज़ार और समापन पर आतिशबाज़ी शामिल हैं।
उर्स या मेले के दौरान यात्रा की योजना बनाने से पहले स्थानीय स्तर पर तारीखों और व्यवस्थाओं की जानकारी ले लें। अगर आप इनमें से किसी आयोजन के समय जा रहे हैं, तो लखनऊ से निकलने से पहले परिवहन की व्यवस्था की पुष्टि कर लें।
सुविधाएँ और ज़रूरी जानकारी की पुष्टि
यात्रा से पहले संबंधित परिवहन संचालकों या स्थानीय अधिकारियों से बस सेवाओं, स्थानीय परिवहन और आयोजन की मौजूदा व्यवस्थाओं की पुष्टि कर लें। टैक्सी, तिपहिया वाहन और जीप परिवहन के विकल्प हैं, लेकिन किराया और सेवा की जानकारी बदल सकती है। निकटतम रेलवे स्टेशन बाराबंकी है और निकटतम हवाई अड्डा लखनऊ में है।
Hotel Vijay Paradise लखनऊ में स्थित एक तीन सितारा होटल है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
देवा शरीफ कहाँ है?
देवा शरीफ, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ज़िले का एक तीर्थस्थल है। यह ज़िला मुख्यालय से 12 किमी दूर है।
देवा शरीफ किसलिए प्रसिद्ध है?
इसे हाजी वारिस अली शाह के जन्मस्थान और समाधि-स्थल के रूप में जाना जाता है। इसकी दरगाह में हिंदू और ईरानी वास्तुकला की झलक मिलती है।
क्या लखनऊ से देवा शरीफ के लिए बसें चलती हैं?
UPSRTC की बसें लखनऊ और देवा शरीफ के बीच 6:00 AM से 9:00 PM तक चलती हैं। यात्रा से पहले मौजूदा सेवा की जानकारी की पुष्टि कर लें।
देवा मेला कब लगता है?
देवा मेला संतों की स्मृति में आयोजित होने वाला दस दिन का आयोजन है। इसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और खेल कार्यक्रम शामिल होते हैं। तारीखों और व्यवस्थाओं की जानकारी स्थानीय स्तर पर जाँच लें।
